
Ludhiana| दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा अंतराष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य पर हरनामपुरऻ लुधियाना आश्रम में एक दिवसीय योग शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के संस्थापक एवं संचालक श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी महाशारदा भारती जी ने अपने उदगार व्यक्त करते हुए कहा कि महर्षि पतंजलि ने योग सुत्र की रचना इसीलिए ही की है कि एक इंसान योग का सहारा लेकर अपने शरीर व मन को स्वस्थ कर सकें। अगर शरीर स्वस्थ है तो प्रत्येक कार्य में इंसान अपना सम्पूर्ण योगदान दे पाएगा। हमारे शास्त्र भी कहते है *।। पहला सुख निरोगी काया।।* हमारे शरीर के माध्यम से हम समस्त कर्मो को करते है और उन कर्मो के आधार पर ही हमें सुख या दु:ख की प्राप्ति होती है। इस अवसर पर उपस्थित आशुतोष जी की शिष्या डॉक्टर कविता वर्मा ने कहा कि अगर इंसान अपने जीवन काल में योग का अभ्यास करता रहे तो वह इंसान कभी रोगी नहीं हो सकता है। योग के द्वारा प्रत्येक समस्या का निराकरण संभव है। उन्होंने उपस्थित लोगों को योगाभ्यास करवाते हुए कपाल भाती यौगिक क्रिया सिखाई और बताया कि केवल मात्र कपाल भाती क्रिया करने से 80 प्रतिशत से अधिक बिमारियों का निदान हो जाता है। उन्होंने कहा कि जो साधक कपाल भाती यौगिक क्रिया करता है उसको कभी हार्ट अटैक, किडनी की समस्या, लीवर की समस्या, शूगर का रोग, ब्रेन सट्रोक, बी.पी. हाई रहना, बी.पी. लो रहना होने की कोई संभावना ही नहीं रहती। फिर उन्होनें कहा कि कपाल भाति के बीच में अगर हम तीन बंध लगाने से कपाल भाति की शक्ति बहुत ज्यादा बढ़ जाती है इस लिए कपाल भाती करते समय बीच बीच में तीन बंध का प्रयोग करते रहना चाहिए। उसके बाद उन्होनें ने अनुलोम विलोम प्राणायाम करते हुए कहा कि मॉडर्न मैडीकल साइंस का मानना है कि हमारे ब्रेन के दो पार्ट होते हैं। अगर ब्रेन के दाईं ओर बल्ड की सरकूलेशन में कमी आती है तो बाईं ओर की साइड को पैरालाइज़ हो जाता है। अगर यह समस्या बाईं ओर आती है तो दाई ओर की साईड को पैरालाईस हो जाता है। अगर हम दाईं ओर से श्वास भरते हैं तो बाई साईड एक्टिवेट होती है बाई ओर से श्वास भरने से दाईं साईड एक्टिवेट होती है तो जब हम दोनों द्वारा बार बार से श्वास भरते हैं तो दोनो साईड सक्रिय होती है। यह केवल मात्र अनुलोम विलोम प्राणायाम से ही संभव होता है। उन्होंने बताया कि भ्रामरी प्राणायाम करने से हाइपर टैंशन, माइग्रेन, स्मरण शक्ति कम होना जैसी अनेक बिमारियों का निदान संभव है। योग के माध्यम से अगर आप अपने शरीर को तंदुरूस्त रखते है तो आप के सौ वर्ष तक जीवन को भोगने की संभावना बढ जाती है। हमारे पुरातन समय के ऋषि इसका ज्वलंत उदाहरण है।