
फगवाड़ा (शिव कौड़ा) : राष्ट्रीय वाल्मीकि सभा के प्रधान पवन सेठी ने मध्याकालीन युग के महान कवि संत कबीर दास जी की जयंती के अवसर पर समूह कबीरपंथियों को शुभकामनाएं देेते हुए कहा कि वे मात्र कवि अथवा लेखक ही नहीं बल्कि सुलझे हुए विचारक और समाज सुधारक भी थे। उन्होंने सारा जीवन अपनी वाणी से समाज में फैली कुरीतियों, अंधविश्वास एवं आडंबरों पर निडरता के साथ कुठाराघात किया। पवन सेठी ने कहा कि संत कबीर दास जी समाज में फैले आडंबरों के सख्त विरोधी थे। उन्होंने लोगों को एकता के सूत्र का पाठ पढ़ाया। उनके लिखे दोहे बेहद सरल भाषा में होते थे जो आसानी से किसी की भी समझ में आते हैं और आज भी समाज को दिशा देने का काम कर रहे हैं। कबीर दास जी ने अपने समय के हिन्दू और मुस्लिम समाज में फैले आडंबरों पर दोहे की शैली में व्यंग किया मगर बावजूद इसके दोनों ही समुदाय उनको बराबर सम्मान देते थे। यहां तक कि उनके देहवसान के समय दोनों समुदायों में देह पर अधिकार को लेकर विवाद हो गया। उन्होंने युवा पीढ़ी से आह्वान कर कहा कि वे संत कबीर जी के जीवन एवं उनकी वाणी से प्रेरणा लेकर आपसी भाईचारा मजबूत बनाने की दिशा में काम करें। इस अवसर पर क्लास फोर कर्मचारी यूनियन के प्रधान सुरिन्द्र आदिवासी के अलावा जिम्मी सौंधी, बोबी पलाही, धर्मेन्द्र पीपारंगी व सतिन्द्र बसरा आदि भी उपस्थित थे।