
– संगल यूज प्लास्टिक आइटम्स के विकल्पों पर लगाई प्रदर्शनी
(गुरमीत दुग्गल) कुरुक्षेत्र। पर्यावरण सरंक्षण में कार्यरत ग्रीन अर्थ संगठन ने डीएवी पब्लिक स्कूल में कचरा प्रबंधन पर कार्यशाला आयोजित की गई तथा सिंगल यूज प्लास्टिक आइटम्स के विकल्पों पर प्रदर्शनी लगाई गई। कार्यशाला का शुभारंभ प्रिंसिपल गीतिका जसूजा ने किया तथा सम्बोधित करते हुए कहा कि हम सब ग्रीन कैंपस, ग्रीन बिल्डिंग, ग्रीन ऑफिस की अवधारणा को अपनाकर ही पर्यावरण सरंक्षण कर सकते है। पर्यावरणविद डॉ नरेश भारद्वाज ने बताया कि कचरा प्रबंधन का पहला सिद्धांत है की कचरा कम से कम पैदा हो, दूसरा घर / कार्यालय / संस्थान में ही गिला, सूखा और खतरनाक कचरा अलग अलग रखें, तीसरा गीला कचरा यानि फल, सब्जियां के छिलके आदि या तो पशुओं को खिलाये या खाद बनाए, चौथा सूखे कचरे की गांठ बनाकर उद्योगों में रीसाइक्लिंग के लिए भेजा जाए। हमें इसकी शुरुआत खुद से, घर से तथा कार्यस्थल से करके ही देश को कचरा मुक्त बनाने में भागीदार बनना है तथा मेरा कचरा- मेरी जिम्मेदारी की भावना से ही स्थाई स्व‘छत्ता आएगी। अधिवक्ता सुशील कुमार ने बताया कि सिंगल यूज प्लास्टिक- थमोर्कोल आइटम्स के स्वास्थ्य तथा पर्यावरण के नुकसान के मध्यनजर इनका निर्माण, भण्डारण, बेचना तथा प्रयोग करना पूरे भारत में एक जुलाई 2022 से प्रतिबंधित किया हुआ है। लोगों व संस्थानों को ग्रीन अर्थ संगठन इकोग्रीन प्रोडक्ट्स जैसे पत्ता दोने और पत्तल, गने के छिलके, एरिका पाम व सुपारी के पत्तों से बनी प्लेट्स, चमचें, कांटे, चाकू तथा पेपर स्ट्रॉ व पेपर/ जुटे बैग्स आदि शहर में ही नो प्रॉफिट नो लॉस पर उपलब्ध करवा रहा है। प्रदर्शनी में सिंगल यूज प्लास्टिक, थमोर्कोल आइटम्स के विकल्पों, इकोग्रीन प्रोडक्ट्स रख कर जागरूक किया गया। मोनिका भारद्वाज ने बताया कि संगठन के बर्तन भंडार से कोई भी व्यक्ति व संस्थान प्रयोग करने के लिए स्टील की प्लेट्स, गिलास और चमचें मुफ्त में प्रयोग हेतु ले जा सकता है। कार्यशाला में डॉ स्वाति गुप्ता तथा डॉ मीनाक्षी ने भी प्रतिभागियों को कचरा प्रबंधन के लिए सिंगल यूज प्लास्टिक के प्रयोग को छोडऩे के लिए आह्वान किया। प्रदूषण मुक्ति के लिए सांझी जिम्मेदारी हम सब को निभानी है ताकि हम और भविष्य दोनों सुरक्षित रह सकें।