अमरनाथ यात्रा पर शाहाबाद से दूसरा जत्था रवाना

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– इस वर्ष 2500 श्रद्धालु अमरनाथ यात्रा पहुंचने की तैयारी में

(गुरमीत दुग्गल) कुरुक्षेत्र/शाहबाद। बाबा अमरनाथ बफार्नी की यात्रा 30 जून से शुरू होने जा रही है। जम्मू-कश्मीर में धारा 370 हटने और दो साल कोविड-19 संक्रमण से प्रभावित होने के बाद यह यात्रा का आयोजन है, जिसमें शामिल होने के लिए शाहाबाद के श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर है। इसमें शामिल होने के लिए शाहाबाद से श्रद्धालुओं का दूसरा जत्था वीरवार सुबह रवाना हो गया है, वहीं अन्य श्रद्धालु भी तैयारियों में जुटे हैं। आज जाने वाले जत्थे की अगुवाई अमरजीत सिंह मामूमाजरा कर रहे है। नगर पालिका के प्रधान गुलशन क्वात्रा ने जत्थे को हरी झंडी देकर रवाना किया है।   गुलशन क्वात्रा ने बताया कि बाबा अमरनाथ की यात्रा के लिए शाहाबाद से पहला जत्था 18 जून को भंडारा लेकर रवाना हुआ था और आज दूसरा जत्था रवाना हो रहा है। हर वर्ष करीब 2000 से 2500 यात्री जाते हैं। धारा 370 हटाने की कवायद के कारण वर्ष 2019 में यात्रा बीच में ही रोक दी गई थी। इसके बाद 2020 और 2021 में कोविड-19 संक्रमण के कारण यात्रा नहीं हुई। इसलिए इस बार श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर हैं, इसी कारण शाहाबाद से इस वर्ष 2500 श्रद्धालुओं की अमरनाथ यात्रा जाने की तैयारी है।

जिक्रयोग है कि अमरनाथ यात्रा के लिए मेडिकल और पंजीकरण की प्रक्रिया पहले ही पूरी हो गई थी, वहीं वंचित श्रद्धालु जम्मू और श्रीनगर पहुंच कर मेडिकल और पंजीकरण कराने की तैयारी में हैं। वीरवार को शुरू हो रही यात्रा में शामिल होने के लिए पहला जत्था 29 जून को जम्मू से सेना की सुरक्षा के बीच पहलगांव और बालटाल के लिए रवाना हो गया। इस मौके राजेश कुमार उप्पल, जगतार सिंह, प्रदीप कुकरेजा, दीपक पोपली, विजय हसीजा और दिनेश कुमार मौजूद थे।

बालटाल मुश्किल, तो चंदनबाड़ी है लंबा रास्ता : अमरजीत सिंह

यात्रा की अगुवाई कर रहे अमरजीत सिंह मामूमाजरा ने बताया कि अमरनाथ यात्रा के लिए दो रास्तों में से चंदनबाड़ी से गुफा तक का रास्ता करीब 34 किमी का है, जो दो से तीन दिन में पूरा होता है। इसमें पहला पड़ाव शेषनाग और दूसरा पड़ाव पंजतरणी होता है। वहां से गुफा तक पहुंचा जाता है। यहां का प्राकृतिक सौंदर्य, घाटी, नदियां, ऊंचे पहाड़ यात्रा की मुश्किलें आसान बना देते हैं। वहीं बालटाल का रास्ता 14 किमी का है, लेकिन खड़ी चढ़ाई वाला होने के कारण मुश्किल है। दोनों रास्ते संगम पर मिलते हैं। चंदनबाड़ी और बालटाल से यात्रा के लिए गेट सुबह 6 बजे खुलते हैं, दोपहर 12 या एक बजे तक ही यात्रियों को यात्रा शुरू करने की अनुमति दी जाती है। पांच हजार यात्री या मौसम खराब होने पर यात्रा अगले दिन तक के लिए रोक दी जाती है।

 

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